<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591</id><updated>2011-12-04T03:13:32.662-08:00</updated><title type='text'>RTI WATCH</title><subtitle type='html'>सूचना के कानून की पहरेदारी</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>11</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-7376645650745049784</id><published>2009-06-23T05:54:00.000-07:00</published><updated>2009-06-23T06:07:56.494-07:00</updated><title type='text'>आरटीआई अधिनियम की हिन्दी की अशुदि्धयां दूर</title><content type='html'>&lt;p&gt;सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) का जब हिंदी में अनुवाद हुआ तो उसमें कई गलतियां रह गयीं थी। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इन अशुदि्धयों को दूर कराने के लिए कोशिश शुरू की और 14 महीने बाद आखिर उसकी कोशिश  रंग लायी हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्शन विभाग ने इन अशुदि्धयों को दूर कर दिया गया है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;विधि मंत्रालय ने अधिनियम के हिंदी रूपांतरण में 34 बदलावों को शामिल किया है। इसे जल्द ही मंत्रालय के साथ-साथ कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया जाएगा। विभाग के निदेशक के.जी. वर्मा ने बताया कि विधि मंत्रालय ने शुदि्धपत्र तैयार कर लिया है। आरटीआई अधिनियम के मूल अंग्रेजी संस्करण में पब्लिक अथॉरिटी को ऐसे किसी प्राधिकार, निकाय या संस्थान के तौर पर परिभाशित किया गया है जो केंद्र और राज्य सरकारों के तहत आता है। वहीं हिन्दी अनुवाद में इसे केंद्र के स्वामित्व, नियंत्रण या वित्तपोषण वाले निकाय के तौर पर परिभाषित किया गया है। इसने राज्य सरकार के अधिकारियों को सूचना न देने का बहाना दे दिया था। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके अतिरिक्त भी हिन्दी संस्करण में कई त्रुटियां थीं। पिछले साल अप्रैल में सेवानिवृत्त कोमोडोर लोकेश बत्रा ने इस ओर ध्यान दिलाया था। बत्रा ने प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला को इस मुद्दे पर पत्र लिखा। जब उनके आवेदन पर कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में आरटीआई आवेदन दाखिल किया और अपनी शिकायत पर की गयी कार्रवाई का विवरण मांगा। पीएमओ के जवाब से असंतुष्ट बत्रा ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की। इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय के मुख्य सूचना अधिकारी ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर डीओपीटी को पत्र लिखा है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;पत्र तो लिखा गया लेकिन एक साल तक आवेदन ऐसे ही फाइलों में पड़ा रहा और ठोस कार्रवाई नहीं की गयी। बत्रा ने अबकी जून में डीओपीटी में आरटीआई दाखिल कर कार्रवाई के बारे में पूछा। इस आवेदन के बाद गेंद इधर-उधर घूमने लगा और आखिरकार विधि मंत्रालय ने इसमें संशोधन कर दिया।     &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-7376645650745049784?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/7376645650745049784/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=7376645650745049784' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/7376645650745049784'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/7376645650745049784'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2009/06/blog-post_23.html' title='आरटीआई अधिनियम की हिन्दी की अशुदि्धयां दूर'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-1045068455148699413</id><published>2009-06-22T09:26:00.000-07:00</published><updated>2009-06-22T09:28:37.388-07:00</updated><title type='text'>आरटीआई की जानकारी के लिए नया पोर्टल</title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत जानकारी हासिल करने के लिए उसकी प्रक्रिया जानना आवश्यक है। आम तौर पर लोगों को यह प्रक्रिया पता नहीं होती, जिस कारण चाहकर भी लोग इस कानून का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। इसी को ध्यान में रखकर एक समूह ने नये तरह का पोर्टल विकसित किया है। यह पोर्टल सरकारी नहीं है। चंडीगढ़ स्थित यह समूह सूचना का अधिकार कानून के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना चाहता है।&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;br /&gt;आरटीआई यूजर्स एसोसिएशन द्वारा विकसित &lt;a href="http://www.rightto.info/"&gt;www.rightto.info&lt;/a&gt; नामक इस पोर्टल का लक्ष्य देशभर में आरटीआई का इस्तेमाल करनेवालों का एक मजबूत नेटवर्क विकसित करना है। एसोसिएशन के समन्वयक हेमंत गोस्वामी के अनुसार, उन्होंने यह मंच इसलिए बनाया है ताकि देशभर में आरटीआई का इस्तेमाल करनेवाले लोग अपनी जानकारी और निष्कर्षों का आपस में आदान-प्रदान कर सकें। &lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;br /&gt;यह संगठन उन्हें व्यापक सार्वजनिक हित वाली विभिन्न तरह की गतिविधियों को संचालित करने और उसे बढ़ावा देने के लिए एक सहज मंच मुहैया कराएगा। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-1045068455148699413?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/1045068455148699413/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=1045068455148699413' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/1045068455148699413'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/1045068455148699413'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2009/06/blog-post_22.html' title='आरटीआई की जानकारी के लिए नया पोर्टल'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-8739079368995060960</id><published>2009-06-01T06:38:00.000-07:00</published><updated>2009-06-01T06:45:48.638-07:00</updated><title type='text'>अमेरिका में सार्वजनिक दस्तावेज भारत में गोपनीय</title><content type='html'>सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गयी सूचना के बाद एक सरकारी हास्यास्पद तथ्य सामने आए हैं। अमेरिकी सरकार ने जिस सूचना को सार्वजनिक कर दिया है, भारतीय विदेश मंत्रालय उसे गोपनीय बनाए हुए है। यह मामला इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में 1972 में एक भेदिया होने से जुड़ा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;केंद्रीय सूचना आयोग की ओर से इस मामले में सूचना प्रदान करने का निर्देश मिलने के बाद विदेश मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि तत्कालीन विदेशमंत्री स्वर्ण सिंह और अमेरिकी सचिव विलियम रोजर्स के  बीच 5 अक्टूबर 1972 को हुई बातचीत के रिकॉर्ड उपलब्ध थे लेकिन गोपनीयता का दावा करते हुए उसने इसका खुलासा करने से इनकार कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह सूचना `सीआईएजआई ऑन साउथ एशिया ´ के लेखक अनुज धर ने आरटीआई के तहत मांगी थी। पुस्तक में इस मामले का विवरण है। हालांकि, मंत्रालय ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह विदेशी सरकारों, अखबारों और पुस्तकों की खबरों का संज्ञान नहीं ले सकती है क्योंकि वे अप्रमाणिक हैं। धर ने एक समाचार एजेंसी से कहा, `जहां मंत्रालय गोपनीयता शर्त का दावा कर रहा है वहीं अमेरिकी सरकार ने सिंह और रोजर्स के बीच इंडियन एलिगेशंस रिगार्डिंग  शीर्षक से बातचीत का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है।´ जासूस मामले ने उस समय तहलका मचा दिया था जब यह बात सामने आयी कि एक वरिष्ठ भारतीय मंत्री कथित तौर पर कैबिनेट की बैठकों से संबंधित अहम जानकारी सीआईए को लीक कर रहा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धर द्वारा प्रदान सार्वजनिक दस्तावेज में दोनों नेताओं के बीच बातचीत का सारांश है। इसमें रोजर्स ने भारत में सीआईए की गतिविधियों को लेकर सार्वजनिक बयान देने के लिए भारत सरकार की आलोचना की थी। धर ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी कि पत्रकार सेमुअर हर्ष  की पुस्तक `द प्राइस ऑफ पॉवर : किसिंजर इन द निक्सन व्हाइट हाउस´ में लगाये गये आरोपों से जुड़ा अगर कोई रिकॉर्ड हो तो उसकी फोटो प्रति उपलब्ध करायी जाए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-8739079368995060960?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/8739079368995060960/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=8739079368995060960' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/8739079368995060960'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/8739079368995060960'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2009/06/blog-post.html' title='अमेरिका में सार्वजनिक दस्तावेज भारत में गोपनीय'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-6511031917650561848</id><published>2009-05-26T08:14:00.000-07:00</published><updated>2009-05-26T08:15:40.052-07:00</updated><title type='text'>प्रधानमंत्री के लिए निजी डॉक्टर क्यों</title><content type='html'>कभी समाजवादी नेता डा। राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि उन्हें भी वही सुविधा चाहिए जो आम आदमी को मयस्सर है। अपनी इसी नीति के कारण उन्होंने सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया और इसी दौरान डॉक्टरों की कुछ गलती से उनकी मौत भी हो गयी। उनका अंतिम संस्कार भी उनकी इच्छानुसार विद्युत शवदाह गृह में ही किया गया ताकि कोई तामझाम न हो और न ही कोई स्मारक बने। दिल्ली में नेताओं के लिए अंत्येष्टि स्थलों की भव्यता देख कर ही लोहिया ने कहा था कि ऐसा रहा तो एक दिन दिल्ली श्मशानों की नगरी बन जाएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन उनके बाद भी वह परंपरा कायम रही और तमाम बड़े नेताओं के मरने के बाद उनके नाम पर कई-कई एकड़ों में समाधि स्थल बनाए गए। सत्ताधारी पार्टी के नेता तो नजला जुकाम होने पर विदेश इलाज के लिए दौड़ते ही थे, सत्ता में आने या करीब पहुंचने पर लोहिया की धारा के और दूसरे विपक्षी नेता भी अमेरिका की दौड़ इलाज के लिए लगाने लगे। इतना ही नहीं अगर नेताओं का इलाज देश में भी हो रहा हो तो स्पेशल तौर पर देश- विदेश से निजी डॉक्टर बुलाने की अपसंस्कृति भी विकसित हुई। अटल जी के घुटने का ऑपरेशन हुआ तो अमेरिका से डॉक्टर आए तो वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ। मनमोहन सिंह की बाईपास सर्जरी के लिए भी निजी डॉक्टर बुलाए गए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस पर एक आरटीआई आवेदक जगदीश चंदर जेटली ने सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी कि प्रधानमंत्री की सर्जरी निजी डॉक्टर डॉ। रमाकांत पांडा और एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट की उनकी टीम से क्यों करायी गयी, जबकि एम्स के पास इसकी सारी सुविधाएं और विशेशज्ञता उपलब्ध है। इसपर एम्स का जवाब टालमटोल का रहा। तब आवेदक केंद्रीय सूचना आयोग में अपील मे आए। डॉ. सिंह की इसी साल 24 जनवरी को एम्स में कोरोनरी आर्टरी बाइपास सर्जरी हुई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सूचना आयुक्त् अन्नपूर्णा दीक्षित ने पूछा कि डॉ। पांडा को सर्जरी करने के लिए बुलाने के फैसले पर कैसे पहुंचा गया और इसके क्या कारण थे ? अगर इस संबंध में कोई बैठक हुई तो उस बारे में भी 20 जून तक आवेदक को जानकारी मुहैया करायी जाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जेटली ने सीआईसी में दलील दी कि एम्स ने जानकारी दी थी कि प्रधानमंत्री की जिस तरह की सर्जरी की गयी उसकी विशेशज्ञता उसके पास है। फिर डॉ। पांडा की विशेषज्ञता के बारे में एम्स को कोई जानकारी भी नहीं है। जेटली ने आरोप लगाया कि यह अकल्पनीय है कि एम्स ने डॉ. पांडा की विशेषज्ञता जाने बगैर प्रधानमंत्री का आपरेशन करने की उन्हें इजाजत दे दी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि एम्स का पक्ष था कि निजी डॉक्टर बुलाने का उसके यहां कोई खास नियम नहीं है। नियम में कहा गया है कि मरीज के हित में संस्थान मे निदेशक कोई भी प्रशासनिक निर्णय लेने में सक्षम है। लेकिन क्या यह भी जानने लायक बात नहीं है कि एम्स सामान्य मरीजों के लिए भी ऐसे निर्णय लेता है ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-6511031917650561848?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/6511031917650561848/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=6511031917650561848' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/6511031917650561848'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/6511031917650561848'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2009/05/blog-post_2651.html' title='प्रधानमंत्री के लिए निजी डॉक्टर क्यों'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-8273030353792903607</id><published>2009-05-26T04:46:00.000-07:00</published><updated>2009-05-26T04:48:44.702-07:00</updated><title type='text'>साली का ब्यौरा आरटीआई से, कितना उचित</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;सूचना का अधिकार कानून तमाम सकारात्मक पहलुओं के साथ कुछ गलत कामों का भी जरिया  बन गया है। मसलन, इस कानून का उपयोग कर अब लोग निजी खुन्नस निकालने लगे हैं। यह कहना है केंद्रीय सूचना आयुक्त एम।एम. अंसारी का। हालांकि इसमें जो उदाहरण आयोग ने दिया है, वह किसी भी तरह से निजी नहीं है बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता से जुड़ा है, जिसे प्रोत्साहित करने के लिए यह कानून बनाया गया था, लेकिन इसका उद्देश्य निजी ही है। ऐसे मामलों को किस तरह से निपटाया जाए, यह एक ज्वलंत सवाल है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;अंसारी ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस कानून का दुरुपयोग पारिवारिक झगड़े या निजी खुन्नस निकालने में व्यापक पैमाने पर किया जा रहा है। इनमें तलाक और हर्जाने के दावे जैसे मामले भी हैं। घटना के अनुसार, दिल्ली के आई।पी. अग्रवाल ने वाणिज्य विभाग में कार्यरत अपनी साली के वैयक्तिक और सरकारी ब्यौरे की सूचना मांगी। दरअसल अग्रवाल का अपनी पत्नी से झगड़ा चल रहा है और इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने साली की सूचना मांगी है। विभाग ने यह कहते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया कि यह सूचना निहायत ही निजी है। हालांकि अंसारी ने भी विभाग के नजरिए से सहमति जतायी लेकिन यह भी कहा कि इसे रोकना असंभव है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;यहां सवाल यह है कि अग्रवाल की साली के सरकारी ब्यौरे भी सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता से जुड़े ही माने जाएंगे। लेकिन ऐसे मामलों में फर्क कैसे किया जा सकता है कि सूचना मांगने वाला निजी खुन्नस निकालने के लिए मांग रहा है या पारदर्शिता सार्वजनिक करने के तहत। कुछ भी अगर एक मामले में सूचना आयोग व्यक्तिगत गुण-दोश के आधार पर इस तरह की सूचना दिलवाने से रोकेगा तो यह उन मामलों में नजीर के तौर पर पेश किया जाएगा जहां सार्वजनिक तौर पर पारदर्शिता के लिए सूचना सार्वजनिक करना अति आवश्यक भी होगा। इसलिए इस मामले में अग्रवाल की साली से संबंधित सरकारी ब्यौरे को सार्वजनिक किया जाए और निजी ब्यौरा देने से इनकार कर दिया जाए. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-8273030353792903607?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/8273030353792903607/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=8273030353792903607' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/8273030353792903607'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/8273030353792903607'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2009/05/blog-post_26.html' title='साली का ब्यौरा आरटीआई से, कितना उचित'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-496864017383323138</id><published>2009-05-25T04:17:00.000-07:00</published><updated>2009-05-25T04:20:40.420-07:00</updated><title type='text'>काले धन पर आडवाणी से सीआईसी ने मांगी सफाई</title><content type='html'>&lt;p&gt;केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने लोकसभा में नेता विपक्ष लालकृश्ण आडवाणी के कार्यालय को उन कारणों को बताने का निर्देश दिया है, जिसके चलते वह स्विस बैंक में भारतीय काले धन के संबंध में श्री आडवाणी, प्रधानमंत्री डॉ। मनमोहन सिंह और केंद्रीय वित्तमंत्री के बीच हुई खतो-किताबत की जानकारी देने से इंकार कर दिया है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;सीआईसी के उप सचिव पंकज श्रेयस्कर ने जन सूचना अधिकारी सुभाष अग्रवाल की शि़कायत पर जन सूचना आयुक्त को लिखा, `आयोग आपको निर्देश देता है कि इस िशकायत पर टिप्पणी करें ... सूचना उपलब्ध नहीं कराने की वजह को स्पष्ट रूप से बताएं। अग्रवाल ने नेता विपक्ष के कार्यालय में आरटीआई के तहत आवेदन देकर पूर्व गृहमंत्री व उप प्रधानमंत्री रह चुके आडवाणी द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र और उस पर वित्तमंत्री के जवाब की विस्तृत जानकारी मांगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आवेदक ने स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा काले धन के संबंध में उन पत्रों और उनके उत्तर, फाइल टिप्पणियों और इस मुद्दे से जुड़े सभी दस्तावेजों की प्रतियों की मांग की थी। विपक्ष के नेता के कार्यालय की ओर से अग्रवाल को कोई जवाब नहीं दिए जाने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग से िशकायत की। यह मामला चुनाव पूर्व प्रचार अभियान के दौरान सामने आया जब भाजपा नेता ने स्विस बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने के प्रयास करने का वादा किया। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-496864017383323138?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/496864017383323138/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=496864017383323138' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/496864017383323138'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/496864017383323138'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title='काले धन पर आडवाणी से सीआईसी ने मांगी सफाई'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-160280178975659222</id><published>2008-07-01T10:52:00.000-07:00</published><updated>2008-07-01T10:53:40.516-07:00</updated><title type='text'>मोबाइल और इंटरनेट हैं आत्महत्या के कारण</title><content type='html'>क्या मोबाइल फोन और इंटरनेट आईआईटी छात्रों की आत्महत्या का कारण हैं ? अधिकारियों की माने तो यह सही है। पर इसके और भी कारण हैं। आईआईटी अधिकारी यह नहीं मानते कि पाठ्यक्रम बहुत कठिन है अथवा पढ़ाई का बहुत अधिक दबाव है। उनका कहना है कि आत्महत्या की वजह है अधिक से अधिक पारिवारिक दबाव जो आज के मोबाइल और इंटरनेट के कारण है। यह पहले नहीं था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूचना का अधिकार कानून के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में आईआईटी ने बताया है कि असली अपराधी मोबाइल है। आज से दस साल पहले मोबाइल फोन का अधिक प्रयोग नहीं होता था। छात्र मोबाइल का प्रयोग न के बराबर करते थे। तब वे अपना ध्यान पढाई पर केंद्रित करते थे। लेकिन आज वे रात-दिन मोबाइल पर ही व्यस्त रहते हैं। परिवार व दोस्तों से मोबाइल संपर्क के कारण वे हमेशा पारिवारिक समस्याओं और तनावों से उलझे रहते हैं। जवाब में आत्महत्या का दूसरा कारण इंटरनेट को बताया गया है। हालांकि, आईआईटी दिल्ली के निदेशक सुरेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि जबतक ठोस अध्ययन न हो तब तक उनकी आत्महत्या की वजह को मोबाइल या इंटरनेट से नहीं जोड़ा जा सकता।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आईआईटी एल्यूमनी भारत पुनर्निर्माण दल की तोया चटर्जी ने एक छात्र की आत्महत्या के बाद इस संबंध में 2 जून को आरटीआई के तहत आईआईटी कानपुर से जानकारी मांगी थी। बीते तीन साल में आईआईटी कानपुर के छह छात्रों ने आत्महत्या की है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-160280178975659222?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/160280178975659222/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=160280178975659222' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/160280178975659222'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/160280178975659222'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2008/07/blog-post_01.html' title='मोबाइल और इंटरनेट हैं आत्महत्या के कारण'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-6901883946453508249</id><published>2008-07-01T03:46:00.000-07:00</published><updated>2008-07-01T03:51:22.237-07:00</updated><title type='text'>आरटीआई के सबसे ज्यादा मामले दिल्ली पुलिस और डीडीए में</title><content type='html'>&lt;p&gt;दिल्ली में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सबसे अधिक आवेदन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली पुलिस से संबंधित जानकारियों के लिए जमा किए जा रह हैं। आवेदनों की बड़ी संख्या को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी के लोग डीडीए और दिल्ली पुलिस से कितने नाराज हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;आरटीआई के क्षेत्र में काम कर रहे एक गैर सरकारी संगठन `कबीर´ के अनुसार, अक्टूबर 2005 से दिसम्बर 2007 के बीच डीडीए के पास आरटीआई के 12,790 आवेदन पहुंचे। इसी अवधि में दिल्ली पुलिस के पास 12,229 आवेदन पहुंचे। कबीर से जुड़े कार्यकर्ता नीरज कुमार ने बताया, `दिल्ली पुलिस और डीडीए ने आरटीआई के आवेदन सबसे अधिक प्राप्त किए हैं। इससे पता चलता है कि लोगों को यहां से सबसे अधिक समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है।´&lt;/p&gt;&lt;p&gt;दिल्ली पुलिस और डीडीए के बाद सबसे अधिक आवेदन प्राप्त करनेवालों में शिक्षा विभाग, खाद्य आपूर्ति व ग्राहक मामलों से संबंधित विभाग, दिल्ली जलबोर्ड और उद्योग आयुक्त कार्यालय है। नीरज बताते हैं, `हमें ये आंकड़े आसानी से प्राप्त नहीं हुए हैं। कई विभागों ने हमें आरटीआई आवेदन के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराये।´ आरटीआई के तहत सबसे कम आवेदन चिट फंड विभाग को मिले। (आईएएनएस)&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-6901883946453508249?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/6901883946453508249/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=6901883946453508249' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/6901883946453508249'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/6901883946453508249'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2008/07/blog-post.html' title='आरटीआई के सबसे ज्यादा मामले दिल्ली पुलिस और डीडीए में'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-3834563067690841083</id><published>2008-06-30T06:47:00.000-07:00</published><updated>2008-06-30T06:55:56.626-07:00</updated><title type='text'>जानकारी न देने पर हुडा पर जुर्माना</title><content type='html'>हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) को प्लॉट के बारे में जानकारी न देना बहुत महंगा पड़ गया है। राज्य सूचना आयोग ने एक आवेदक द्वारा `सूचना का अधिकार´ कानून के तहत मांगी जानकारी को न देने पर हुडा के एस्टेट ऑफिसर - वन को फटकार लगाते हुए उनपर 3000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। आयोग ने हुडा को आदेश जारी करते हुए 30 जून तक मांगी गयी सूचना उपलब्ध कराने को भी कहा है।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आवेदक विजय रानी गर्ग ने 18 जुलाई 2007 को सूचना का अधिकार कानून के तहत हुडा के एस्टेट ऑफिसर-वन से सेक्टर 12 ए व सेक्टर 6 में खरीदे गये अपने प्लॉट के बारे में जानकारी मांगी थी। लेकिन दर्जनों बार कोशिश करने के बावजूद उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गयी। इसके बाद आवेदक ने 25 सितम्बर 2007 को हुडा प्रशासक से अपील की। उन्होंने इस मामले में हुडा के लोक सूचना पदाधिकारी से जानकारी मांगी। सूचना पदाधिकारी ने कुछ जानकारी दी लेकिन वह अधूरी थी। अंत में परेशान होकर आवेदक ने 30 मई 2008 को राज्य आयोग में अपील की। इस कानून के तहत आवेदक को समय पर जानकारी न देने के कारण आयोग ने हुडा के एस्टेट ऑफिसर वन पर 3000 रुपये का जुर्माना लगा दिया। इसके अलावा ऑफिसर को 30 जून तक जानकारी देने को भी कहा है, जिसकी समय सीमा आज पूरी हो गई। अभी पता नहीं चला कि आवेदक को जानकारी मिली है या नहीं।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;कुछ अनुभवी लोगों के अनुसार सूचना पदाधिकारी इस कानून के तहत मांगी सूचना की जानकारी तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं, लेकिन फिलहाल इसपर सख्ती नहीं की जा रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-3834563067690841083?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/3834563067690841083/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=3834563067690841083' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/3834563067690841083'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/3834563067690841083'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2008/06/blog-post_30.html' title='जानकारी न देने पर हुडा पर जुर्माना'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-6386797518234590419</id><published>2008-06-20T10:23:00.000-07:00</published><updated>2008-06-20T10:25:28.784-07:00</updated><title type='text'>मालगुजारी की दर तय नहीं है बिहार में</title><content type='html'>बिहार में एक ओर जहां किसानों की हालत बाढ़ और सूखे के कारण खास्ता रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार भी उसे चूसने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। अब सरकार द्वारा किसानों से वसूली जानेवाली मालगुजारी की बात करें तो सरकार की ओर से अंधेरगर्दी का आलम है। सरकार मौका मिलते ही किसानों से अनाप-शनाप मालगुजारी वसूल रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बिहार में मालगुजारी की दर जमीन की किस्मों के आधार पर 1962 में सर्वे के समय ही तय कर दी गई थी। इस दर को प्रत्येक किसान के खतियानों पर लिख भी दिया गया था। लेकिन कई खतियान ऐसे थे, जिनपर भूलवश यह दर दर्ज नही हो पाई। हालांकि उस खतियान में दर्ज जमीनों जैसी किस्म वाली अन्य आसपास की भूखंडों की दर दूसरे खतियानों पर दर्ज है। लेकिन अब जब बिना दर्ज वाले खतियानों के कास्तकारों ने मालगुजारी अदा करना चाहा तो उनसे मनमानी दर वसूली जा रही है। ऐसा एक वाकया मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल में सामने आया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बिना दर दर्ज खतियान पर ब्लॉग लेखक जब 2000 में मालगुजारी अदा करने गया तो उससे आसपास की समान किस्म की जमीन की तय मालगुजारी से चार गुना से अधिक मालगुजारी वसूली गई। पूछने पर अंचल कार्यालय के कर्मचारी ने बताया कि आजकल मालगुजारी की दर काफी बढ गई है इसलिए यही समुचित दर है। मालगुजारी की दर के बारे मे जब `सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005´ के तहत 22.11.07 को जानकारी मांगी गई तो अंचल कार्यालय ने अपने पत्रांक 1083 दिनांक 26.12.07 के जवाब में साफ बताया कि मालगुजारी की दर जो खतियानों पर लिखी है, उसी अनुसार वसूली हो रही है। इसमें संशोधन की कोई सूचना कार्यालय को नहीं है। यही सवाल जब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, पटना से भी पूछा गया तो उसका जवाब था कि इस तरह की सूचनाएं और उससे संबंधित दस्तावेज अंचल कार्यालय में ही उपलब्ध रहती हैं। विभाग ने यह आवेदन मुशहरी अंचल को ही हस्तांतरित कर दिया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उधर, मुशहरी अंचल के असंतोषजनक जवाब के बाद प्रथम अपील की गई तो वहां अंचल के लोक सूचना पदाधिकारी तीन तारीखों पर भी उपस्थित नहीं हुए और तब प्रथम अपील प्राधिकारी ने मामले को राज्य आयोग में ले जाने का निर्देश देते हुए इसे बंद कर दिया। इसके बाद मुशहरी के अंचल पदाधिकारी ने पूर्वोक्त जवाब ही अपीलीय प्राधिकारी के यहां जमा करा दिया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;याची इस बारे में मामले को राज्य सूचना आयोग, पटना में अपील में है। आयोग द्वारा इसकी प्रथम सुनवाई की तारीख 3 जुलाई रखी गई है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-6386797518234590419?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/6386797518234590419/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=6386797518234590419' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/6386797518234590419'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/6386797518234590419'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2008/06/blog-post_20.html' title='मालगुजारी की दर तय नहीं है बिहार में'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5767033530863438591.post-2866789412934966005</id><published>2008-06-07T06:46:00.000-07:00</published><updated>2008-06-08T05:38:12.226-07:00</updated><title type='text'>माफी के बाद भी बिहार में मालगुजारी वसूली</title><content type='html'>बिहार के एक अंचल में गरीब किसानों से बेवजह मालगुजारी वसूली जा रही है। राज्य में सीमांत किसानों की बड़ी संख्या है और उनके लिए मालगुजारी माफी का आंदोलन दशको तक चलता रहा। इसके बाद सरकार ने मालगुजारी माफी का ऐलान भी कर दिया। लेकिन वसूलनेवाली इकाई को शायद यह जानकारी नहीं है। वह ऐसे गरीब किसानों से भी पूरी मालगुजारी वसूल रही है। यह खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 (आरटीआई) के तहत मांगी गयी जानकारी में हुआ है। अगर पूरे बिहार में यही हाल है तो इस वसूली की राशि सालाना लाखों में हो सकती है। यहां एक अंचल का तो साक्ष्य मौजूद है लेकिन लगता है पूरे बिहार में एक जैसी ही स्थिति है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बिहार में इस समय 38 जिले, 101 सब डिवीजन और 534 अंचलों के अंचल सह ब्लॉक के अंतर्गत 45,103 राजस्व ग्राम है। प्रदेश का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इस बात को स्वीकार करता है कि राज्य के 2 हेक्टेयर से कम जमीन जोतनेवाले किसानों की मालगुजारी माफ की गयी है। लेकिन राज्य का ही एक अंचल इस बात की जानकारी होने से इनकार करता है। बिहार में कृषि भूमि की मालगुजारी अंचल कार्यालय द्वारा ही वसूली जाती है। आरटीआई के तहत मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी अंचल कार्यालय से आईडी संख्या 22 दिनांक 26।11.2007 को मांगी गयी सूचना कि `कितनी जोत सीमा तक मालगुजारी माफ है और मालगुजारी कितने एकड़ के बाद लागू हो जाती है ?´ के जवाब में पत्रांक 1083 दिनांक 26.12.07 को दी गयी जानकारी में कहा गया है कि `मालगुंजारी माफी संबंधी कोई सूचना अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।´&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन इसी कानून के तहत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, मुख्य सचिवालय, पटना से मांगी गयी सूचना कि `कितनी जोत सीमा तक मालगुजारी माफ है और कितनी ?´ के जवाब में लोक सूचना पदाधिकारी सह उप सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, पटना ने पत्र संख्या - सू।अ.को.रा.भू.- 31/08 1244 (सू.अ.)/ रा. के तहत जवाब दिया है कि `घ. राजस्व विभागीय पत्रांक- 415 दिनांक 16.6.2000 के अनुसार दो हेक्टेयर तक कृषि प्रयोजनादि भूमि पर मालगुजारी माफ है, लेकिन उसपर लगने वाले सेसे की वसूली जारी रहेगी´। यहां सेस कौन कहे, पूरी की पूरी मालगुजारी वसूली जा रही है। इस बारे में पूरे बिहार के सभी अंचलों से तहकीकात किए जाने की जरूरत है कि आखिर यह पैसा किस नियम के तहत वर्षों से राजकोष में जमा हो रहा है। और इसका कोई ऑडिट भी नहीं हो रहा है।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;"&gt;&lt;span class=""&gt;हिन्दुस्तान&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5767033530863438591-2866789412934966005?l=rtiwatch.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://rtiwatch.blogspot.com/feeds/2866789412934966005/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5767033530863438591&amp;postID=2866789412934966005' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/2866789412934966005'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5767033530863438591/posts/default/2866789412934966005'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://rtiwatch.blogspot.com/2008/06/blog-post.html' title='माफी के बाद भी बिहार में मालगुजारी वसूली'/><author><name>अतुल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17662104942306989873</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>3</thr:total></entry></feed>
